भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है,जिस्मे सभी धर्म के लोग रहतें है जिस्के आधार पर स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि भारत विश्वगुरु हो सकता है।पर हम सभी आजकल जाती और धर्म मे इतने बट गये है के हम इस लक्ष्य से बोहोत दूर हुए है।हिंदु-मुस्लिम आज एकदुसरे से नफरत करते दिखाई देते है,या फिर राजनीती का फायदा उठाने के लिये आपसमे फूट डालते है।ये भगवे है,ये निले है,ऐसे भेद बनाके हमने अपने महापुरुषोको भी धर्म के रंगो मे बांट रखा है तो फिर हम ही इतने भटके हुए है तो फिर कैसे हम विश्वगुरु कि और बढेंगे?